बचपन का समय हमें ज्यादा लंबा क्यों महसूस होता हैं?

हेल्लो फ्रेंड्स. आज हम बात करेंगे समय के बारे में. Speed of Life. विशेष रूप से हमारे पास कितना समय हैं? एक इन्सान ज्यादा से ज्यादा कितना बुढा हो सकता है? फिलहाल, इस क्षण में, पृथ्वी पर सिर्फ 36 लोग हैं जो की सन 1800 में पैदा हुए थे. यह 36 लोग तीन अलग अलग शताब्दियों में रह चुके हैं. जैसे जैसे चिकित्सा विज्ञान फैलता गया हैं वैसे वैसे जीव विज्ञान की हमारी समझ में सुधार होता गया हैं. इस वक़्त लोग ज्यादा से ज्यादा जी पा रहे हैं. मनुष्य जैसे जैसे बड़े होते वैसे वैसे उनके मरने की संभावनाए बढती जाती हैं. लेकिन कुछ जीव ऐसे हैं जिन्हें Negligible Senescence कहा जाता हैं, यानी की नगण्य बुढ़ापा. जिनको जैविक अमरत्व के रूप में भी जाना जाता है. इस प्रकार के जीवों को कभी भी वास्तविक उम्र के नजरिए से नहीं देखा गया हैं. हाइड्रा जैसे जीव सिर्फ कोई दुर्घटना, बीमारी, या शिकारियों की वजह से ही मरते हैं. दुनिया के सबसे पुराने जीवित पेड़ को अधिक से अधिक 4600 वर्ष की उम्र का दर्ज किया गया है. उसे मतूशेलह ट्री  (Methuselah Tree) कहा जाता है.
लेकिन चलिए हम फिर से इंसानों पर वापस आते हैं. समय कैसा होता हैं इस बात की बहस छोड़कर यह देखते हैं की समय कैसा महसूस होता हैं. मेरा मतलब एक आम मनुष्य अपने जीवनकाल के दौरान समय को किस तरह महसूस करता है? अपने जीवन के गहन क्षणोंवाले, मुसीबतोंवाले, किसी तीव्र क्षणवाले,जब वो boar हो रहा हो या दुःख के समय को एक आम इन्सान बहुत लंबे चलने वाले समय के रूप में याद रखता हैं. उस इंसान को गहन क्षणोंवाले समय को छोड़कर बाकि का बिता समय बहुत कम महसूस होता हैं. क्योंकि उस वक़्त की बहुत ही कम चीज़े वह याद रखता हैं. जब की दुःख के समय की सभी चीज़े उसे याद रहती हैं इसलिए ऐसा समय उसके लिए बहुत लंबा होता हैं. मनोवैज्ञानिकों का इस बारे में कहना हैं की, हमारा दिमाग हमारे जीवनकाल में घटित होनेवाली सामान्य घटनाओं की तुलना में गहरी और बहुमूल्य यादों को अपने अन्दर रख लेता हैं. मान लीजिए की आपके साथ 2 साल पहले ऐसी कोई घटना हुई थी. वह घटना 3 दिनों की थी और उन तीन दिनों पहले के 7 दिन सामान्य थे. तो आपको यह तीन दिन उस 7 दिनों से लम्बे महसूस हुए होंगे. जब आपके अनुभव तीव्र होते हैं तब आप उसके बारे में अधिक बातें याद नहीं कर रहे हैं, बल्कि आप उसकी और अधिक प्रतियां बना रहे हैं. सिर्फ सामान्य यादें बनाने के बजाय, तनाव के दौरान प्रमस्तिष्कखंड (amygdala) शामिल हो जाता है और ज्यादा चीज़े याद रहती हैं. कई लोग विश्वास करते हैं की इसी वजह से तीव्र क्षणों को लंबे समय वाली टिकाऊ यादों रूप में याद किया जाता हैं.
यह घटना एक वृहद पैमाने पर दिमाग चकरा देनेवाली बन जाती हैं. इस को इस तरीके से सोचे : जब एक इन्सान एक साल का बच्चा होता हैं, तब यह एक वर्ष उसके जीवन के 100 प्रतिशत को Represent करता है (दर्शाता हैं). लेकिन जब वह दो साल का होता हैं तब वह दूसरा साल उसके लिए उसकी आधी जिन्दगी के बराबर होता हैं. जब वह अपने जीवन के तीसरे साल को जीता हैं तब वह तीसरा साल उसके जीवन के केवल एक तिहाई जितना होता है. जब वह 80 सालों का हो जाता हैं तब एक साल उसके जीवन के 80 वे हिस्से को Represent करता है.
यह सारे प्रतिशत बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह इस बात को दर्शाते हैं की आपका बचपन आपको अपनी बाकि की जिंदगी से लंबा महसूस क्यों होता हैं. क्योंकि जब आप बड़े होते जाते हैं आपके लिए वक़्त किसी जेट प्लेन की तेजी से बीतता चला जाता हैं. जब आप जवान थे तब आपने ज्यादा तीव्र अनुभवों को महसूस किया था. सबसे पहले आपने भाषा को समजना सिखा, उसके बाद आपने पहली बार अपनी माता को देखा, उसके बाद आपने चलना सिखा, आप पहली बार स्कूल गए. और ऐसी कई चीज़े आप धीरे धीरे समजते गए. यह चीज़े आपके दिमाग के द्वारा बहुत ही गहराई पूर्वक और बड़े पैमाने पर याद रखी हुई होती हैं. इसलिए बाद में, कुछ वक़्त गुजरने पर यह कुछ इस तरह महसूस होती हैं की इन्होने घटित होने के लिए ज्यादा समय लिया. ऊपर की तस्वीर को आप ध्यान से देखे. उस में दिखाए गए ग्राफ में मध्य का बिन्दु आपके जीवन के शुरुआत के 16 साल ही हैं.
निराश मत होइए. अच्छी खबर यह हैं की आपको इसके लिए ज्यादा से ज्यादा तीव्र चीज़े करनी पड़ेगी. जैसे की जो चीज़े आप देखते हैं, जिन जगहों पर आप घूमते हैं, जिन लोगो को आप मिलते हैं. आप के लिए समय धीरे से बीतेगा. आप खुद को अधिक समृध्ध महसूस करेंगे. तो बाहर जाइए, कुछ रोचक कीजिए, कुछ अजीब, कुछ नया, जैसे की आप बचपन में करते थे.
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