Observer Effect In Hindi अवलोकन वास्तविकता को प्रभावित कर सकता है

एक जंगल में एक पेड़ अचानक ही गिर जाता हैं लेकिन उसकी आवाज कोई भी नहीं सुनता हैं और ना ही उसे किसीने गिरते हुए देखा. गिरने पर वह आवाज तो अवश्य करता हैं. किसी ने उसकी आवाज नहीं सुनी इसका मतलब यह तो नहीं की वह गिरा ही नहीं. यही कारण हैं की देखनेवाला या प्रेक्षक वास्तविकता (Reality) को प्रभावित (Affects) नहीं कर सकता. पेड़ जैसी बड़ी चीजों को तो कदापि नहीं. लेकिन छोटी चीजों की बात अलग हैं, जैसे की फोटॉन और इलेक्ट्रॉन. एक माइक्रोन से छोटे स्केल पर देखनेवाला उस चीज़ की वास्तविकता को प्रभावित कर सकता हैं. इस घटना को Observer Effect कहते हैं.

प्रकाश तरंगों में यात्रा करता है. लेकिन सन 1900 के प्रारंभ में अल्बर्ट आइंस्टीन इस मुद्दे को लेकर उलझन में थे. फोटो-इलेक्ट्रिक प्रभाव, जहाँ प्रकाश अगर किसी धातु की सतह पर गिरता हैं तो उसकी वजह से इलेक्ट्रान रिलीज़ होते हैं. लेकिन यह तभी मुमकिन हैं जब प्रकाश असतत कणों में यात्रा करता है. तब ऐसे कणों को आइंस्टीन ने light quanta नाम दिया था और जिसे आज हम  photons (फोटोन) कहते हैं. प्रकाश खुद photons का बना होता हैं यह तो हम सब जानते ही थे. वैज्ञानिकों ने देखा की प्रकाश कुछ परिस्थितिओं में लहरों के स्वरुप में और कुछ परिस्थितिओं में कणों के स्वरुप में यात्रा करता हैं. यह बात क्वांटम मैकेनिक्स से संबंधित हैं. क्वांटम मैकेनिक्स के डबल स्लिट प्रयोग के बारे में तो आप जानते ही होंगे. यह प्रयोग observer effect (पर्यवेक्षक प्रभाव) का एक उदाहरण है. जब हम किसी भी चीज़ को देखते हैं या मापते हैं तो उसके उसकी मूल परिस्थिति में बदलाव हो जाता हैं. इसी घटना को ही observer effect (पर्यवेक्षक प्रभाव) कहा जाता हैं.

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Observer Effect

जब आप किसी चीज़ को देखते हैं तो क्या होता हैं? जब आप किसी चीज़ को देख रहे होते हैं तब आप की आँखों से प्रकाश के photons की एक रेखा निकलती हैं जो उस चीज़ पर पड़ती हैं. उस चीज़ के परमाणु के अन्दर के इलेक्ट्रॉन्स पर पड़ती हैं. इसका मतलब उस चीज़ के परमाणुओं पर थोड़ी मात्रा में ही सही लेकिन फोटोंस के टकराने पर कुछ तो असर पड़ता ही हैं. परमाणु के रेग्युलर पैटर्न में बदलाव होता हैं और उस चीज़ पर कुछ न कुछ प्रभाव तो पड़ता ही हैं. यह प्रभाव इतना ताकतवर नहीं होता की चीज़ को हिला दे या उठाकर कही और गिरा दे. पर्यवेक्षक प्रभाव तब ही मुमकिन हैं जब उसे कोई चेतन वस्तु द्वारा देखा जा रहा हो या उसका मापन किया जा रहा हो. क्योंकि किसी चेतन वस्तु से ही किसी चेतन और अचेतन चीज़ का अस्तित्व पता लग सकता हैं. अगर ब्रह्माण्ड में कोई चेतन वस्तु ना हो तो इसका मतलब ब्रह्माण्ड का अस्तित्व ही नहीं हैं.

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हमारा अपनी आँखों की मदद से किसी चीज़ को देखना इतनी भी सामान्य प्रक्रिया नहीं जितनी वह दिखती हैं. अगर आप किसी चीज़ को देख रहे हैं तो आप निसंदेह उस पर असर डाल रहे हैं. यह असर कितना ताक़तवर हो सकता हैं वह तो आपकी नजर और आपकी चेतना पर निर्भर करता हैं. चेतना इसलिए क्योंकि हमारी चेतना यानी हमारे विचार. और हम जानते हैं की हमारे विचार एक तरह की उर्जा ही हैं. हमारे भारत देश में कहते हैं ना की ” तुम्हे किसी की नजर न लग जाए. ” यह बात शायद इस राज़ से ही जुडी हो सकती हैं. आपका क्या कहना हैं इस बारे में? कमेंट्स में अपने प्रतिभाव दीजिएगा.

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2 Comments

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  2. rahul

    absulutly right very nice theory sir. Any person see any beutiful thing this is not him, during seeing time his internal thout are effected this thing i realy feel this.

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