हमे चीजें डरावनी क्यों लगती हैं?

डर हमें जीवन देता हैं. डर ही हम पर खतरा होने पर खुद की जान बचाने पर मजबूर करता हैं. वैसे डर कई तरह के होते हैं. किसी जहरीले साँप या भूखे बाग़ को देखकर डर लगना आम बात हैं क्योंकि वो हमारी जान ले सकते हैं. लेकिन ऐसे डर का क्या मतलब हैं जो हमे किसी तरह का कोई खतरा न होने पर भी महसूस होता हैं. उदाहरण के लिए real ghost stories in hindi. जी हाँ, एक टेडी बियर को ही ले लीजिए. 32 मानव दांतोंवाला टेडी बियर. या फिर smile.jpg… आप गूगल में जा कर smile.jpg लिखकर इमेज सर्च कीजिए और देखीए क्या मिलता हैं.

ऐसी तस्वीरों में कुछ तो ऐसी अलग बात हैं जो दूसरी तस्वीरों से अलग हैं. अगर आप बंदूक लेकर खड़े किसी आदमी की तस्वीर देखे या पृथ्वी पर गिरते हुए किसी उल्कापिंड की तस्वीर. दोनों तस्वीरों में खतरा तो साफ़ दिखाई देगा लेकिन जब आप मानव दांतवाले टेडी बियर या smile.jpg. की तस्वीर देखेंगे तो आपको ज्यादा डर लगेगा. क्योंकि ऐसी तस्वीरों से आपको खौफ महसूस होता हैं. अगर आप ऐसी चीज़े या तस्वीरे रात के समय देख रहे हैं या उनके बारे में सुन रहे हैं तो रात को आपको अच्छी नींद आएगी ये बात तो भूल ही जाइए. भले ही इन चीजों का वास्तविक जीवन में किसी भी तरह का अस्तित्व ना हों. लेकिन इनमें ऐसा क्या हैं जो हम में खौफ पैदा करता हैं? हम इंसानों के अन्दर खौफ की भावना क्यों और कहाँ से आती हैं?

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Stephen King के मुताबिक तीन तरह के डर होते हैं. पहला होता हैं gross-out. इसका मतलब हैं कुछ गन्दा और बेहत गीनौना. दूसरा होता हैं होरर(Horror). King के मुताबिक ऐसा डर अप्राकृतिक हैं. जैसे की एक बहुत ही विशाल मकड़ी या अँधेरे में अकेले होने पर पीछे से किसी के पकड़ लेने का डर. तीसरा हैं खौफ या आतंक (Terror). आपका अँधेरे में खुद के पीछे किसी चीज़ की मौजूदगी को महसूस करना. आपकी सांस का थम जाना. आपको को महसूस होता हैं की कोई भयानक चीज़ पीछे से आप पर ज़पटने के लिए तैयार हैं. कोई डरावना जानवर जो आपके पीछे अँधेरे में खड़ा हैं. आप जल्दी से वहाँ से भाग़ जाना चाहते हैं. लेकिन पीछे मुड़कर देखने पर वहाँ कुछ भी नहीं होता. इसे खौफ कहते हैं.

 

खौफ जैसी भावनाओं पर अभी तक ज्यादा रिसर्च तो नहीं हुई हैं लेकिन कहाँ जाता हैं इनका कारण हैं विचारों में अस्पष्टता. उदाहरण के लिए मास्क पहने इंसान और किसी जोकर को ही ले लीजिए. कई लोगो को मास्क पहने हुए लोग या जोकर बहुत ही खौफनाक लगते हैं. एक मास्क अपने नीचे के व्यक्ति की सच्ची भावनाओं और इरादों छुपा देता हैं. लोग नहीं जानते हैं की मास्क पहने हुए व्यक्ति से किसी तरह का खतरा हैं या नहीं. उनके लिए यह अस्पष्टता (Vagueness) हैं. मास्क अगर हँसते चेहरेंवाला हो तब भी कई बार डरावना लगता हैं. ज्यादातर चीजें हमे खौफनाक तब लगती हैं जब वह अप्राकृतिक हो और मनुष्य के स्वरुप में हो. जैसे की मनुष्य के शरीर में उसके सिर की जगह पर किसी घोड़े का सिर लगा दे तो वह अप्राकृतिक और डरावना दिखेगा. हम जानते हैं की घोड़े ज्यादातर खतरनाक नहीं होते हैं फिर भी वह मनुष्य शरीर से जुड़े हैं इसलिए भयानक दीखते हैं. ऐसे वक्त हमारा दिमाग तय नहीं कर पाता की क्यां करे और क्यां नहीं. सुरक्षा और खतरे के दो पहाड़ों के बीच खौफ की एक घाटी होती हैं. जहाँ पर हमारा दिमाग ज्ञान और विश्वास की सीमा को तय नहीं कर पाता.

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ऊंचाई से ज्यादातर सबको डर लगता हैं. आप किसी ऊँची बिल्डिंग, पहाड़ या कोई बहुत ही ऊँची जगह पर तो गए ही होगे. जहाँ जाते ही आपको चक्कर आने शुरू हो गए हो और आप नर्वस महसूस करने लगे हो. लेकिन ऐसी जगह पर हम सब एक और चीज़ महसूस करते हैं. ज्यादा ऊंचाई पर जाते ही हमे महसूस होता हैं की कोई हमे निचे धकेलने की कोशिश कर रहा हैं यह जानते हुए की आपके साथ कोई नहीं हैं. कई बार तो हमारे दिमाग में ही निचे कूद जाने के विचार आते हैं. क्या आप कभी भी जिन्हें आप बहुत प्यार करते हैं उनके साथ या किसी खास दोस्त के साथ ऊँची जगह पर गए हैं? अवश्य गए होगे. वहाँ जाते ही आपके दिमाग में कभी न कभी ऐसा ख़याल तो आया ही होगा की आप उन्हें यहाँ से धक्का देकर नीचें धकेल सकते हैं. यह इतना आसान हैं. भले ही आप उन्हें बहुत प्यार करते हो. सही कहाँ ना? जब आप ऐसी ऊँची जगह पर होते हैं तो आपकी रक्षा प्रवृत्ति आप को दूर खींचती हैं. लेकिन आपके संतुलन और मोटर सिस्टम इसे नहीं समज पाते हैं.

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हमारे जीवित रहने के लिए खौफ बहुत ही जरुरी हैं. डर और खौफ से ही हमे हमारे कद और कमजोरियों के विषय में पता चल सकता हैं. लेकिन दूसरी तरफ उनको अनदेखा करना इससे भी अच्छी बात हैं. खौफ हमे याद दिलाता हैं की दुनिया अस्पष्टता और अनिश्चितताओं से भरी हैं.

 

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1 Comment

  1. Durgesh

    nice

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