शुक्र Venus In Hindi

Planet Venus

Venus In Hindi

ग्रह की प्रोफाइल

वजन : 4,86,73,20,00,00,00,000 अरब किलो (0.815 x पृथ्वी का वजन)

भूमध्यरेखीय व्यास : 12,104 किमी

ध्रुवीय व्यास : 12,104 किमी

भूमध्यरेखीय परिधि : 38,025 किमी

चन्द्रमा : कोई नहीं

कक्षा का अंतर : 108,209,475 किमी (0.73 AU)

कक्षा अवधि : 224.70 धरती के दिन

सतह का तापमान : 462° C

पहली जानकारी : 17 वीं सदी ई.पू. बेबीलोन खगोलविदों द्वारा दर्ज
शुक्र का एक दिन उसके एक साल से भी बड़ा होता हैं.

शुक्र को अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने के लिए उसे 243 पृथ्वी के दिन जितना समय लगता हैं, जब की सूरज के आसपास एक चक्कर पूरा करने के लिए 225 पृथ्वी के दिन जितना समय लगता हैं. इसलिए शुक्र का एक दिन उसके एक साल से भी बड़ा होता हैं.

शुक्र को अक्सर ” पृथ्वी की बहन ” ग्रह कहा जाता है.

पृथ्वी और शुक्र आकार में बहुत समान हैं. दोनों के व्यास में केवल 638 किमी का ही अंतर हैं. शुक्र के पास पृथ्वी का सिर्फ 81.5% द्रव्यमान ही हैं. दोनों के केंद्र में पिगला हुआ कोर हैं.

शुक्र वामावर्त (Counter-Clockwise) घूमता है.

इसके अलावा इसे प्रतिगामी रोटेशन के रूप में भी जाना जाता है. इसकी वजह शायद भूतकाल में हुई किसी लगुग्रह या अन्य पदार्थों के साथ हुई टक्करें हो सकती हैं.

शुक्र रात के आसमान में दिखनेवाला सबसे ज्यादा चमकदार पदार्थ हैं.

रात्रि के असमान में केवल चंद्रमा सबसे ज्यादा उज्जवल दीखता हैं. -3.8 से -4.6 परिमाण (Magnitude) के साथ शुक्र रात्रि का दूसरा सबसे ज्यादा चमकदार पदार्थ होता हैं.

शुक्र पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी की तुलना में 92 गुना अधिक होता है.

शुक्र का द्रव्यमान पृथ्वी के जितना ही हैं, लेकिन जब कई छोटे छोटे पत्थर या उल्काएँ शुक्र वातावरण में पहुँचने के साथ ही नष्ट हो जाते हैं, जिसकी वजह से इस ग्रह की सतह पर किसी भी तरह के छोटे खड्डे या क्रेटेर्स नहीं हैं. इस ग्रह की सतह पर महसूस होनेवाला दबाव पृथ्वी के किसी गहरे समुद्र के निचे महसूस होनेवाले दबाव जितना होगा.

शुक्र को सुबह के तारे और श्याम के तारे (Morning Star and the Evening Star) के नाम से जाना जाता हैं.

प्राचीन काल के लोग शुक्र को दो अलग अलग चीज़े मानते थे. ग्रीक लोग उसे Phosphorus और Hesperus के नाम से तथा रोमन उसे Lucifer और Vesper के नाम से जानते थे. क्योंकि जब शुक्र सूर्य के आसपास चक्कर लगता हैं तब वह पृथ्वी की कक्षा को भी ओवरटेक करता हैं. जिसकी वजह से वह सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय के पहले थोड़ी देर दीखता हैं.

शुक्र हमारे सौर मंडल में सबसे गर्म ग्रह है.

शुक्र की सतह का औसत तापमान 462 डिग्री सेल्सियस है, क्योंकि उसका उसकी धुरी पर किसी भी तरह का जुकाव नहीं हैं. चारों ओर 96.5 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड वायु वाला गर्म वातावरण हैं और सल्फ्यूरिक असिड के घने बादल हैं जो ग्रीन हाउस असर उत्पन करता हैं. सल्फ्यूरिक असिड के घने बादलों की वजह से बाहर से इसकी सतह को देखना नामुमकिन हैं.

शुक्र का विस्तृत अध्ययन अभी चल रहा है.

2006 में, वीनस एक्सप्रेस नामक अंतरिक्ष यान यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा वीनस की कक्षा में भेजा गया था, जो आज इस ग्रह के बारे में जानकारी वापस भेज रहा है. इसकी जानकारी के मुताबिक 1,000 से अधिक ज्वालामुखी या 20 किलोमीटर से भी बड़े ज्वालामुखी केन्द्र शुक्र की सतह पर पाए गए हैं.

रूसियों ने शुक्र के लिए पहला मिशन भेजा था.

1966 में, सोवियत संघ का वेनेरा 3 अंतरिक्ष यान शुक्र पर जानेवाला सबसे पहला मानव निर्मित यान था.

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