ब्रह्माण्ड की सबसे गर्म चीज़ क्या हैं?

Hottest Thing In The Universe ब्रह्माण्ड की सबसे गर्म चीज़ क्या हैं?

सुबह में उठकर सबको गर्म कोफ़ी या चाय चाहिए ही चाहिए. चाहे वह आधा कप ही क्यों न हो लेकिन गर्म होनी चाहिए. लेकिन कितनी गर्म? इतनी की वह ब्रह्माण्ड की सबसे ज्यादा गर्म चीज़ हो? बिलकुल नहीं. तो फिर ब्रह्माण्ड की सबसे गर्म चीज़ क्या हैं? मेरा मतलब हैं हम जानते हैं की एक निरपेक्ष शून्य होता हैं. तो बिलकुल ऐसे ही कोई निरपेक्ष गर्मी या तापमान होता हैं? एक बिंदु जहाँ पर तापमान सबसे ज्यादा गर्म होता हैं, लेकिन उस तापमान से अधिक गर्म न हो सके.
खैर, यह पता लगाने के लिए मानव शरीर से शुरुआत करते हैं. आपके शरीर का आंतरिक तापमान स्थिर नहीं होता है.  37 डिग्री, जो की इंसानी शरीर का औसत तापमान हैं. लेकिन पूरे दिन की साइकिल के दौरान इसमें उतार-चढाव चलता रहता हैं. रात को नींद के दौरान, सुबह 4:30 बजे के आसपास आपका शरीर सबसे ठन्डे, अच्छे, प्राकृतिक और स्वस्थ तापमान तक पहुँच जाता हैं. श्याम को 7 बजे तक यह सबसे उच्चतम होता हैं. कई बार हमे बुखार हो जाता हैं जो की ज़रा भी अच्छा नहीं हैं. लगभग 108 डिग्री फेरनहाइट हमेशां घातक होता है. पृथ्वी पर अब तक का सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किया गया तापमान Death Valley पे था, जो की 129 डिग्री फेरनहाइट तक पहुँच गया था. कोफ़ी बनाने के लिए, 180 डिग्री फेरनहाइट तापमान पानी के लिए Recommended तापमान हैं. 210 डिग्री फेरनहाइट तापमान वाले पानी से आपका चॉकलेट केक तैयार हो जाएगा. 2,000 डिग्री फारेनहाइट जमीन से बाहर निकलते ताजा लावे का तापमान है.

हमारे सूरज की सतह का तापमान 5,500 डिग्री सेल्सियस होता हैं. लेकिन उसके मध्य में, जहाँ फ्यूज़न की प्रक्रिया होती हैं, वहाँ तापमान 28 लाख डिग्री फारेनहाइट तक पहुँच जाता हैं. जिसे हम 15 लाख केल्विन भी कह सकते हैं. जब किसी पदार्थ का तापमान सूरज के केंद्र जितना हो जाए, तो उसमे से उर्जा की एक विशाल राशी दूर निकलती हैं. अगर आप एक छोटी सी पिन को सूरज के केंद्र के तापमान जितना गर्म किया जाए तो, वह उससे 1,000 मिल दूर खड़े इंसान को भी जलाकर मार सकती हैं.लेकिन हमारा सूरज ब्रह्माण्ड का सबसे गर्म पदार्थ नहीं हैं. मेरा मतलब हैं 15 लाख केल्विन तापमान अविश्वसनीय तो है, लेकिन एक थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट के दौरान तापमान 350 लाख केल्विन तक पहुँच जाता हैं. वैसे यह तापमान थोड़े समय तक ही उपलब्ध रहता हैं. लेकिन जब कोई तारा मरने वाला होता हैं तब खुद के अन्दर ही ढह जाता हैं, तब तारे के कोर के अंदर का तापमान 3 अरब केल्विन तक पहुँच जाता हैं. जिसे 3 गिगाकेल्विन भी कहते हैं. लेकिन जब आप एक टेराकेल्विन तक पहुँचेगे तब चीज़े भयानक होने लगेंगी. हमारा सूरज जिस चीज़ से बना हैं उस प्लाज्मा के बारे में तो आप जानते ही होंगे. एक टेराकेल्विन तापमान के दौरान पदार्थ के परमाणु के प्रोटोंस और न्युट्रोन्स quirks और gluons के स्वरुप में पिघलने लगेंगे, बिलकुल किसी सूप की तरह. लेकिन एक टेराकेल्विन कितना गर्म होता हैं?

WR 104 नाम का एक सितारा है, जो हमारे सौरमंडल से 8,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं. जिसका मास हमारे 25 सूरज के बराबर हैं. अगर वह तारा मरता हैं, तब उसका आंतरिक तापमान इतना ज्यादा होगा की वह उर्जा को उत्सर्जित करेंगा. उसके द्वारा बाहरी अंतरिक्ष में फेंका गया गामा रे रेडिएशन इतना भयानक होगा की उससे निकलनेवाली उर्जा हमारा सूरज अपने पूरे जीवनकाल में भी उत्पन नहीं कर पाएँगा. वैसे गामा रे विस्फोट काफी कम समय तक ही चलते हैं, इसलिए हमारी पृथ्वी ज्यादातर तो उनसे सुरक्षित हैं. पृथ्वी के 4702 खरब मील की दूरी पर होने के बावजूद, जब WR 104 खुद के अन्दर ढह जाएंगा, तब उससे निकलनेवाली उर्जा हमारे लिए अभी भी बुरी खबर होगी. पहले 10 सेकंड के अन्दर ही पृथ्वी की ओजोन की परत ख़त्म हो जाएंगी और जीवन का खात्मा हो जाएंगा, वह भी 8,000 प्रकाश वर्ष की दूरी से.

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सैद्धांतिक रूप से, हम चाहे प्रणाली में कितनी भी ऊर्जा की राशि को जोड़ते जाए, इसके लिए ऐसी कोई भी सीमा नहीं है. हम नहीं जानते हैं की प्लैंक तापमान से परे जाने पर क्या होता हैं? आप एक तर्क दे सकते हैं की, इतनी अधिक उर्जा एक ही जगह पर एक बड़ा सा ब्लैकहोल पैदा कर सकती हैं, और ऐसी उर्जा से बने ब्लैकहोल के लिए एक विशेष नाम हैं – Kugelblitz.

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