चूहा बिल्ली की कहानी | chuha billi ki kahani

चूहा बिल्ली की कहानी | chuha billi ki kahani

 

चूहा बिल्ली की कहानी | chuha billi ki kahani

 

क्या आपने कभी किसी बिल्ली को गले में घंटी के साथ देखा है? शायद हाँ, लेकिन कार्टून में।

 

इस कहानी में एक बिल्ली और दूसरे सबसे अहम किरदार चूहे हैं। कहानी में मजेदार कॉमेडी और मनोरंजक तत्वों के साथ बिल्ली और चूहों की एक अनूठी जोड़ी है। यकीनन आपको यह कहानी पढ़कर अच्छा लगेगा।

 

चूहा बिल्ली की कहानी 

 

बहुत समय पहले एक हवेली में हजारों चूहे रहते थे। हवेली का मालिक चूहों से परेशान था क्योंकि चूहे हवेली में खाने के भण्डार को खराब और समाप्त कर रहे थे।


एक दिन अचानक हवेली के मालिक की तबियत खराब हो गयी तो उसने सोचा की वह तो कमजोरी के कारण चल फिर भी नहीं पा रहा है और इसका फायदा उठाकर चूहे हवेली में रखे अनाज का भण्डार समाप्त और खराब कर देंगे ।

 

हवेली के मालिक ने एक योजना बनाई की चूहों से निपटने के लिए एक बिल्ली को हवेली में छोडना होगा, बिल्ली को देखकर सारे चूहे भाग जायेगे और कुछ को बिल्ली खा जाएगी ।

 

अगले दिन, जैसा कि हवेली के मालिक ने योजना बनाई थी, चूहों को भागने और मारने के लिए एक बड़ी सफेद बिल्ली लाया।

 

बिल्ली दिन भर घात लगाकर चूहों का शिकार करती और बहुत से चूहों को जख्मी कर देती और जब भी उसे भूख लगती एक दो चूहों को मार गिराती।

 

ऐसा काफी बार होने लगा था और इस वजह से चूहे अपने बिल से बाहर आने से डरते थे। यह देखकर हवेली का मालिक अपने फैसले से बहुत खुश हुआ क्योंकि बिल्ली ने उसे सभी नुकसानों से बचा लिया।

 

यह देखते हुए कि चूहे दिन-ब-दिन मर रहे थे चूहों की परिषद ने एक बैठक बुलाई जिसमें सभी चूहे मौजूद थे। उनमें से प्रत्येक चूहा चिंतित था और यह एक गंभीर मुद्दा था।

 

उनमें से बहुत से चूहों ने अपने विचार रखे लेकिन कुछ भी सही नहीं लगा। उनमें से एक छोटा चूहा था जिसने हाथ उठाकर कहा, "क्यों न हम बिल्ली के गले में घंटी बांध दे ? जब भी बिल्ली हिलेगी, घंटियाँ शोर करेंगी और यह हमारी चेतावनी का संकेत होगा।इस विचार पर बाकी सभी चूहे खुशी से ताली बजा रहे थे।

 

इस पर सहमति जताते हुए चूहों के मुखिया ने उत्सुकता से पूछा, "लेकिन बिल्ली के गले में घंटी बांधेगा कौन?"

 

अचानक सभा में पिन ड्रॉप साइलेंस हो गया क्योंकि बिल्ली के गले में घंटी बांधने का काम कोई भी नहीं करना चाहता था। उन सभी के मन में डर था की जो भी बिल्ली के गले में घंटी बांधने जायेगा वो मारा जायेगा

 

वे सभी बिल्ली के गले में घंटी बांधने से डर रहे थे और इसलिए कोई भी यह काम नहीं करना चाहता था।

 

यह सब देखकर सभी चूहों ने महसूस किया कि समस्या का समाधान बोलकर बताना आसान है लेकिन वास्तविकता में करना बहुत ही कठिन होता है और किसी भी समस्या का समाधान करना महत्वपूर्ण है और यह समस्या का अंतिम समाधान होता है।

 

चूहों परिषद ने फैसला किया कि वे इस विचार को रद्द कर देंगे और खतरे को खत्म करने के लिए अन्य व्यवहार्य और संभावित समाधान खोजने के लिए आगे बढ़ेंगे।

 

चूहा बिल्ली की कहानी की शिक्षा

 

समस्या से भागने की बजाय उसका सामना करना जरूरी है। आप समस्या का समाधान तभी कर सकते हैं जब आप वास्तव में समाधान को क्रियान्वित करते हैं और यह समस्या का अंतिम समाधान होता है।

 

ज्ञान कभी हार न मानने के बारे में है लेकिन यह जानना है कि कब करना है; इसी तरह चूहों ने अंततः बिल्ली को घंटी नहीं बांधने का फैसला किया, बल्कि कुछ अन्य व्यवहार्य समाधान खोजने के लिए आगे बढ़े।

 

चूहा बिल्ली की कहानी का सारांश

 

यह चूहा बिल्ली की कहानी है जिसमे चूहे बिल्ली की गर्दन पर घंटी बांधने का फैसला करते है ताकि भविष्य में बिल्ली के आने से पहले उन्हें चेतावनी मिल सके। लेकिन सभी चूहे एक बहादुर चूहे को खोजने में विफल रहते हैं जो बिल्ली के गले में घंटी बांधने का कार्य कर सके। इस कहानी को "घंटी और बिल्ली" और "बिल्ली और चूहे की कहानी" के नाम से भी जाना जाता है।


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