हाथी और दर्जी की कहानी | hathi aur darji ki kahani

hathi aur darji ki kahani

 

हाथी और दर्जी की कहानी | hathi aur darji ki kahani

 

hathi aur darji ki kahani - बच्चों क्या आपने हाथी और दर्जी की कहानी सुनी है? यदि नहीं, तो आप बिल्कुल सही जगह आये हैं। दोस्तों नैतिक कहानियाँ बच्चों के लिए सही मार्गदर्शक बनती हैं। नैतिक कहानियाँ बच्चों के नैतिक विकास के साथ-साथ सामाजिक विकास में भी बहुत सहायक होती हैं।

 

एक बार की बात है एक गाँव में एक हाथी रहता था। हाथी जब भी नदी के किनारे नहाने जाता था तो बीच बाजार से होकर गुजरता था। उसी बाजार में दर्जी की एक दुकान थी।

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दर्जी जब भी हाथी को अपनी दुकान से गुजरते देखता था तो उसे कुछ खाने को देता था। दर्जी और हाथी बहुत जल्द घनिष्ठ मित्र बन गए।

 

एक दिन दर्जी का एक ग्राहक से झगड़ा हो जाता है। जिससे दर्जी को बहुत गुस्सा आता है और दर्जी गुस्से में अपनी दुकान पर बेठा होता हैं।

 

हमेशा की तरह हाथी दर्जी की दुकान के सामने से गुजरता है और दर्जी की दुकान पर कुछ खाने के लिए अपनी सूंड दर्जी की दुकान के अंदर करता है, लेकिन दर्जी गुस्से में होने के कारण उसे कुछ खाने के लिए देने के बजाय, दर्जी हाथी की सूंड में सुई चुभो देता है ।

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hathi aur darji ki kahani | हाथी और दर्जी की कहानी

 

हाथी को बहुत दर्द होता है लेकिन हाथी बिना कुछ किये चुपचाप चला जाता है। और नदी के किनारे जाकर स्नान करता है।

 

इसके बाद हाथी अपनी सूंड में नदी का गंदा पानी भर लेता है। और हाथी वापस अपने घर जाते समय फिर से दर्जी की दुकान पर रुकता है और इस बार वह नदी का सारा गंदा पानी अपनी सुंड से दर्जी की दुकान में फेंक देता है।

 

दर्जी की दुकान में लोगो के रखे हुए सारे महंगे कपड़े गंदे हो जाते हैं। दर्जी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है।

 

इस तरह दर्जी को उसके किए की सजा भी मिल जाती है। इसके बाद हाथी फिर कभी दर्जी की दुकान पर नहीं गया।


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हाथी और दर्जी की कहानी (hathi aur darji ki kahani) की नेतिक शिक्षा

 

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए।

जो बोओगे, सो काटोगे।

 

वास्तविक जीवन में हाथी और दर्जी की कहानी का अनुप्रयोग

 

हमें कभी भी किसी के साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए क्योंकि हम जो करते हैं वह भविष्य में हमारे साथ होना निश्चित है।

 

बिना कारण जाने जीवन में कभी भी कोई कदम न उठाएं क्योंकि ऐसा करने से कई बार हमें भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है।

 

जीवन में दो बातें हमेशा याद रखनी चाहिए, पहली यह कि क्रोध में कोई शब्द नहीं बोलना चाहिए और दूसरा खुशी में कोई वादा नहीं करना चाहिए।

 

जानवर बोल नहीं सकते, इसलिए हमें उनके साथ हमेशा सहानुभूति की भावना रखनी चाहिए। हमें उनके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा हम खुद दूसरों से उम्मीद करते हैं। आखिरकार, उन सभी को भी जीने का उतना ही अधिकार है, जितना हम सभी को है।


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