मगरमच्छ और बंदर की कहानी | Magarmach Aur Bandar Ki Kahani

मगरमच्छ और बंदर की कहानी

 

मगरमच्छ और बंदर की कहानी | Magarmach Aur Bandar Ki Kahani

 

मगरमच्छ और बंदर की कहानी:- नैतिक कहानियों का उन सभी बच्चों और वयस्कों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है जो इसे पढ़ रहे हैं। लोग आमतौर पर जो पढ़ते हैं उससे प्रभावित होते हैं। इसलिए, नैतिक कहानियों को पढ़ना महत्वपूर्ण है जो हमारे व्यक्तिगत जीवन में नैतिकता और मूल्यों को बढ़ाएगी।

 

बच्चों के लिए मगरमच्छ और बंदर की कहानी

 

मगरमच्छ और बंदर की नैतिक कहानी पंचतंत्र की एक प्रसिद्ध कहानी है जिसमें दर्शाया गया है कि कैसे एक मूर्ख मित्र के बजाय एक बुद्धिमान शत्रु का होना फायदेमंद है।

 

मगरमच्छ और बंदर की कहानी

 

बहुत समय पहले एक खूबसूरत नदी के किनारे एक सेब के पेड़ पर एक बंदर रहता था। हालाँकि वह अकेला था फिर भी वह खुश और हंसमुख था। बंदर का दिल दयालु होता है वह हमेशा सेब के पेड़ की छाया में आराम करने आए अन्य जानवरों की मदद करता था।


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एक दोपहर एक मगरमच्छ नदी से निकला और पेड़ की छाया में बैठ गया।

 

उसने बंदर से कहा कि वह थक गया है और यहाँ तक पहुँचने के लिए उसने बहुत दूर का सफर तय किया है। बंदर ने उसे खाने के लिए पेड़ से कुछ सेब दिए।

 

मगरमच्छ ने उसके दयालु स्वभाव के लिए उसे धन्यवाद दिया और उससे पूछा कि क्या वह कभी-कभी उसे मिलने के लिए वापस आ सकता है।

 

बंदर मगरमच्छ की यह बात सुनकर प्रसन्न हुआ और बंदर ने मगरमच्छ से कहा कि वह उसका हमेशा मुस्कान के साथ स्वागत करेगा ।

 

उसी दिन से मगरमच्छ और बंदर अच्छे दोस्त बन गए।

 

उस दिन से मगरमच्छ अक्सर बंदर के पास आता था। उन्होंने कई चीजों के बारे में बात की और मीठे और रसीले सेबों को साझा किया।

 

मगरमच्छ और बंदर दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई है।

 

एक दिन मगरमच्छ ने बंदर से कहा कि उसकी पत्नी नदी के उस पार रहती है और वह आपसे मिलना चाहती है और वह आपसे मिलकर बहुत खुश होगी।

 

तो, दयालु बंदर ने कुछ सेब तोड़े और मगरमच्छ की पत्नी के लिए मगरमच्छ को दे दिए।

 

मगरमच्छ की पत्नी को मीठे सेब का स्वाद बहुत पसंद था, लेकिन उसे बंदर और मगरमच्छ की दोस्ती से जलन होती थी।

 

वह उनकी दोस्ती से बिल्कुल भी आश्वस्त नहीं थी। उसने उनकी दोस्ती को खत्म करने के लिए कुछ योजना बनाई।

 

एक दिन मगरमच्छ की पत्नी ने मन ही मन सोचा कि अगर बंदर रोज उन मीठे सेबों को खाता है तो उसका मांस भी मीठा हो गया होगा।

 

इसलिए, मगरमच्छ की पत्नी ने बंदर के साथ उसकी दोस्ती पर विश्वास करने का नाटक किया और उससे कहा कि वह भी बंदर की दोस्त बनना चाहती है।

 

यह सोचकर उसने अपने पति से बंदर को अपने घर बुलाने को कहा। लेकिन मगरमच्छ ने संयम बरतते हुए इस विचार को बाद के लिए टाल दिया।

 

शाम को मगरमच्छ की पत्नी ने उसे बताया कि वह बीमार है और डॉक्टर ने उसे बंदर का दिल खाने के लिए कहा है और अगर वह बंदर का दिल नहीं खाएगी तो वह मर जाएगी।

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अगर आप मुझ से प्यार करते हो तो आप किसी भी कीमत पर बंदर का दिल मुझे लाकर दो । मगरमच्छ अपनी दुष्ट पत्नी के जाल में फंस गया।

 

मूर्ख मगरमच्छ ने अपनी पत्नी की बातों पर विश्वास कर लिया । लेकिन वह बंदर को मारकर अपनी दोस्ती खत्म नहीं करना चाहता था। फिर भी अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए मगरमच्छ नदी के उस पार चला गया और अपने दोस्त बंदर को रात के खाने के लिए आमंत्रित किया।

 

रात को मगरमच्छ बंदर को रात के खाने के लिए लेने आ गया और बंदर को अपनी पीठ पर बैठाकर नदी के उस पार ले जाने लगा ।

 

बंदर और मगरमच्छ की कहानी लिखी हुई

नदी पार करते समय मगरमच्छ पानी में नीचे की और जाने लगा। बंदर घबरा गया और उससे पूछा कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। मगरमच्छ ने जवाब दिया कि वह उसे पानी में डुबो कर मारना चाहता है। उसकी पत्नी बीमार है और उसे जीने के लिए बंदर का दिल खाना होगा ।

 

बंदर चिंतित हो गया लेकिन उसने अपने दिमाग का इस्तेमाल किया और मगरमच्छ को कहा कि आपको मुझे यह पहले बताना चाहिए था।

 

बंदर ने कहा कि उसने अपना दिल पेड़ में छोड़ दिया है। उसने मगरमच्छ से सेब के पेड़ की और चलने का अनुरोध किया ताकि वह उसे अपना दिल दे सके।

 

बेवकूफ मगरमच्छ ने उस पर विश्वास किया और यह जानकर खुश हुआ कि बंदर ने स्वेच्छा से उसे अपना दिल देने का फैसला किया। मगरमच्छ वापस सेब के पेड़ की तरफ तैरता है और सेब के पेड़ के पास पहुँच जाता है ।

 

मगरमच्छ के सेब के पेड़ के पास पहुँचते ही बंदर सुरक्षित रूप से पेड़ पर चढ़ गया और मगरमच्छ से कहा कि तुम वापस तैर कर अपनी पत्नी को बता दो कि उसका पति इतना मूर्ख है कि उसने अपनी पत्नी की इच्छा पर अपने दोस्त की जान लेने की सोच ली और उसने यह भी मान लिया कि कोई अपने दिल को पेड़ पर भूल सकता है।


वह निकटतम शाखाओं में से एक के पास पहुंचा और कुछ सेब उसकी ओर फेंके। बंदर ने कहा कि उसकी पत्नी को उसके दिल के बजाय इनमें से कुछ सेब खाने दो।

 

मूर्ख मगरमच्छ को अब अपनी गलती का एहसास हुआ लेकिन उसने एक सच्चा दोस्त खो दिया था जो उसकी परवाह करता था।

 

बंदर और मगरमच्छ कहानी की उत्पत्ति

 

बंदर और मगरमच्छ की यह आकर्षक और नैतिक कहानी पंचतंत्र के संग्रह से ली गई है। पंचतंत्र एक कहानी के रूप में व्यवस्थित संस्कृत पद्य में प्राचीन दंतकथाओं का संग्रह है।

 

पंचतंत्र की कहानी सभी ने पढ़ी और पसंद की है। ये कहानियाँ न केवल मनोरंजक हैं। बल्कि यह जीवन के कुछ महत्वपूर्ण पाठ भी सिखाती है। इन कहानियों को हर भारतीय घर में पढ़ा, पसंद किया और सुनाया गया था। ये दंतकथाएं न केवल मुस्कान लाती हैं बल्कि हमें एक अच्छा इंसान बनने के लिए प्रेरित और सिखाती भी हैं।

 

मगरमच्छ और बंदर की कहानी का मोरल

 

मूर्ख मित्र की अपेक्षा बुद्धिमान शत्रु का होना सदैव हितकर होता है। अपने आसपास बुद्धिमान लोगों का होना जरूरी है। मूर्ख मित्र रखने से बेहतर है कि बुद्धिमान शत्रु हों।

 

कभी भी अपने आप को कम मत समझो। आप हर समस्या का समाधान पा सकते हैं। आपको बस सोचना है। बंदर की तरह जब भी मुसीबत आए तो समाधान के बारे में सोचें।

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कभी भी किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। बंदर की तरह ही किसी पर भरोसा करने से पहले सोचें। दयालु और उदार बनो लेकिन इतना मूर्ख मत बनो कि किसी दुष्ट के जाल में फँस सको।

 

आपको वैसे ही दयालु होना चाहिए जैसे बंदर अपने दोस्त के साथ अपना सेब बांटता था।

 

अपने मेहमान का हमेशा स्वागत करें, चाहे वह कैसा भी हो। मुहावरे में ठीक ही कहा है- अतिथि भगवान के समान होता है। हमें हमेशा अपने अतिथि का सम्मान करना चाहिए और उनके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा बंदर ने मगरमच्छ के साथ किया।

 

बच्चों के लिए नैतिकता का वास्तविक जीवन में अनुप्रयोग

 

दोस्तों क्विक इंटेलिजेंस आपको बहुत सी परेशानियों से बचा सकता है। जब भी आपको कहानी में बंदर की तरह किसी कठिनाई का सामना करना पड़े तो अपने दिमाग का इस्तेमाल करें। समाधान निकालने का प्रयास करें। जब आप फंसे हों तो उम्मीद न खोएं बल्कि स्थिति से बाहर निकलने के लिए समाधान तलाशें।

 

कभी भी किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, भले ही वह आपका सबसे अच्छा दोस्त हो। हम अक्सर नहीं जानते कि दूसरे लोगों के दिमाग में क्या चल रहा है। झूठे दावों और अफवाहों के बजाय तथ्यों पर विश्वास करें।

 

आपने जो कुछ भी सुना वह सच हो सकता है या नहीं भी हो सकता है। तथ्यों को जाने बिना किसी निष्कर्ष पर नहीं आना चाहिए।

 

लोभ मनुष्य के अंत का कारण बनता है।

 

लालच आपके जीवन को दयनीय बना सकता है। यह निश्चित रूप से आपके पतन का कारण बनेगा। इस कहानी में मगरमच्छ की पत्नी का लालच उसके पति और बंदर की अच्छी दोस्ती को समाप्त कर देता है।

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